
इमानुएल भारद्वाज की रिपोर्ट
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3 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है यह उस औरत का जन्मदिन है जिसने अंधेरे में रोशनी जलाई थी जब लड़कियों को पढ़ना पाप माना जाता था जब किताब उठाने मना था तब एक औरत स्कूल खोल दी नाम था सावित्रीबाई फुले लोग पत्थर मारते थे कोई गोबर फेंकता था कोई गाली देता था लेकिन ओ रुकती नहीं थी अपने थैलों में एक्स्ट्रा साड़ी रखती थी ताकि गंदगी लगे तो बदल सके पर पढ़ना बंद नहीं किया यह वही सावित्रीबाई है जिन्होंने लड़कियों को सिर उठा कर जीना सिखाया जो बोली शिक्षा के बिना इंसान अधूरा है आज अगर बेटी स्कूल जा रही है तो याद रखना इसके पीछे सावित्रीबाई फुले का बलिदान है कई लोग पूछते हैं और कई लोग बोलते भी हैं की बाबा साहब ने क्या किया जिस औरत ने शिक्षा की बुनियाद रखी ओ बाबा साहब उसकी गुरू थी सावित्रीबाई सिर्फ एक नाम नहीं ओ सच है ओ क्रांति है तो हर लड़की का भविष्य है









